SHLOKA (श्लोक)
आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः।
यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम्।।16.17।।
PADACHHED (पदच्छेद)
आत्म-सम्भाविता:, स्तब्धा:, धन-मान-मदान्विता:,
यजन्ते, नाम-यज्ञै:_ते, दम्भेन_अविधि-पूर्वकम् ॥ १७ ॥
ANAVYA (अन्वय-हिन्दी)
ते आत्मसम्भाविता: स्तब्धा: धनमानमदान्विता:
नामयज्ञै: दम्भेन अविधिपूर्वकं यजन्ते।
Hindi-Word-Translation (हिन्दी शब्दार्थ)
ते [वे], आत्मसम्भाविता: [अपने-आपको ही श्रेष्ठ मानने वाले], स्तब्धा: [घमण्डी ((पुरुष))], धनमानमदान्विता: [धन और मान के मद से युक्त होकर],
नामयज्ञै: [केवल नाम मात्र के यज्ञों द्वारा], दम्भेन [पाखण्ड से], अविधिपूर्वकम् [शास्त्रविधि से रहित], यजन्ते [यजन करते हैं।],
हिन्दी भाषांतर
वे अपने-आपको ही श्रेष्ठ मानने वाले, घमण्डी ((पुरुष)) धन और मान के मद से युक्त होकर
केवल नाम मात्र के यज्ञों द्वारा पाखण्ड से शास्त्रविधि से रहित यजन करते हैं।