SHLOKA (श्लोक)
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्।
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्।।2.21।।
PADACHHED (पदच्छेद)
वेद_अविनाशिनम्, नित्यम्, य:, एनम्_अजम्_अव्ययम्,
कथम्, स:, पुरुष: , पार्थ, कम्, घातयति, हन्ति, कम् ॥ २१ ॥
ANAVYA (अन्वय-हिन्दी)
(हे) पार्थ! य: पुरुष: एनम् (आत्मानम्) अविनाशिनं नित्यं अजम् अव्ययं (च) वेद, सः (पुरुषः)
कथं कं घातयति (कथञ्च) कं हन्ति।
Hindi-Word-Translation (हिन्दी शब्दार्थ)
(हे) पार्थ [हे पृथापुत्र ((अर्जुन!))], य: [जो], पुरुष: [पुरुष], एनम् (आत्मानम्) [इस आत्मा को], अविनाशिनम् [नाशरहित,], नित्यम् [नित्य,], अजम् [अजन्मा ], अव्ययं (च) [(और) अव्यय], वेद [जानता है,], स: (पुरुषः) [वह (पुरुष)], कथम् [कैसे], कम् [किसको] , घातयति [मरवाता है], {(कथञ्च) [और कैसे]}, कम् [किसको], हन्ति [मारता है?]’
हिन्दी भाषांतर
हे पृथापुत्र ((अर्जुन!)) जो पुरुष इस (आत्मा) को नाशरहित, नित्य, अजन्मा (और) अव्यय जानता है वह (पुरुष) कैसे किसको मरवाता है
(और कैसे) किसको मारता है?